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भारत-पाकिस्तान के बीच चुपचाप शुरू हुई बातचीत? कोलंबो की बैठक पर उठे सवाल, विदेश मंत्रालय ने दी सफाई

 


भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों से लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा मुद्दों और राजनीतिक मतभेदों के कारण आधिकारिक बातचीत लगभग ठप है। ऐसे माहौल में श्रीलंका की राजधानी **कोलंबो> में हुई एक बैठक को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने एक क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के दौरान आमने-सामने बातचीत की। इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे किसी तरह का संवाद शुरू हो गया है?

हालांकि भारत सरकार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह कोई आधिकारिक वार्ता नहीं थी और सरकार का इससे कोई संबंध नहीं है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, लंदन स्थित International Institute for Strategic Studies द्वारा कोलंबो में दक्षिण एशियाई सुरक्षा संवाद (South Asia Security Dialogue) का आयोजन किया गया था।

इस सम्मेलन में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के बीच होटल हिल्टन कोलंबो में करीब डेढ़ दिन तक अलग-अलग दौर की बातचीत हुई।

हालांकि इस बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल था?

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख हस्तियां शामिल थीं।

इनमें पूर्व भाजपा महासचिव और वर्तमान में India Foundation के अध्यक्ष राम माधव का नाम प्रमुखता से सामने आया।

इसके अलावा पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे तथा पूर्व भारतीय उच्चायुक्त रुचि घनश्याम के भी सम्मेलन में शामिल होने की बात कही गई।

राम माधव ने क्या कहा?

रिपोर्ट सामने आने के बाद राम माधव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई ट्रैक-2 संवाद नहीं था, बल्कि IISS द्वारा आयोजित वार्षिक दक्षिण एशिया सुरक्षा सम्मेलन था, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उन्होंने यह भी बताया कि वे पूरे दो दिवसीय कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।

उनके अनुसार उन्हें केवल एक सत्र में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने अपना संबोधन दिया और उसके बाद कार्यक्रम से लौट गए।

उन्होंने कहा कि इसे अनावश्यक रूप से बड़ा बनाकर पेश किया जा रहा है।

पाकिस्तान की ओर से कौन शामिल हुआ?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सज्जाद हैदर खान शामिल थे।

उनके साथ शेरी रहमान, जो पहले अमेरिका में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकी हैं, भी सम्मेलन में मौजूद थीं।

इसके अलावा सेवानिवृत्त मेजर जनरल इस्फंदियार अली पटौदी के भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की जानकारी सामने आई।

ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 डायलॉग क्या होता है?

इस पूरे विवाद के केंद्र में "ट्रैक-2" और "ट्रैक-1.5" डायलॉग शब्द रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार—

ट्रैक-1 डिप्लोमेसी पूरी तरह सरकारों के बीच होने वाली आधिकारिक बातचीत होती है।

ट्रैक-2 डिप्लोमेसी में दोनों देशों के पूर्व अधिकारी, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सैन्य विश्लेषक और गैर-सरकारी प्रतिनिधि भाग लेते हैं।

वहीं ट्रैक-1.5 डायलॉग में सरकारी अधिकारियों और गैर-सरकारी विशेषज्ञों दोनों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन इसे भी आधिकारिक सरकारी वार्ता नहीं माना जाता।

भारत में कई बार ट्रैक-2 संवाद को बैकचैनल कूटनीति समझ लिया जाता है, जबकि दोनों अलग-अलग अवधारणाएं हैं।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत सरकार ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि दुनिया भर में इस प्रकार के अनेक सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित होते रहते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार की इन बैठकों में कोई आधिकारिक भागीदारी, समर्थन या संलिप्तता नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह निजी स्तर पर आयोजित कार्यक्रम होते हैं और इन्हें भारत सरकार की आधिकारिक नीति या वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।

क्यों बढ़ी चर्चा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक को लेकर चर्चा इसलिए अधिक हुई क्योंकि यह ऐसे समय आयोजित हुई जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध पहले से काफी तनावपूर्ण हैं।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच आधिकारिक बातचीत लगभग बंद रही है।

ऐसे में किसी भी मंच पर दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी स्वाभाविक रूप से सुर्खियां बन जाती है।

क्या इसका संबंध हालिया घटनाओं से है?

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हाल के महीनों में भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों के स्तर पर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर कुछ सार्वजनिक बयान सामने आए हैं।

इसी कारण इस सम्मेलन को लेकर भी अलग-अलग तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं।

हालांकि अब तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता प्रक्रिया दोबारा शुरू होने जा रही है।

शांति की अपील भी सामने आई

इसी बीच भारत और पाकिस्तान की 100 से अधिक प्रमुख हस्तियों ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से शांति बहाल करने की अपील भी की है।

इस संयुक्त अपील में कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने दोनों देशों के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सार्थक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

हालांकि इस पहल को लेकर भी राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं

कई नेताओं ने भारत-पाकिस्तान संवाद के किसी भी प्रयास पर अलग-अलग राय व्यक्त की है।

कुछ नेताओं का कहना है कि आतंकवाद समाप्त किए बिना किसी भी प्रकार की सामान्य बातचीत पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कठिन परिस्थितियों में भी संवाद के विभिन्न मंच खुले रहना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

क्या आगे शुरू होगी आधिकारिक बातचीत?

फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि भारत और पाकिस्तान के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होने जा रही है।

विदेश मंत्रालय की ओर से साफ कर दिया गया है कि कोलंबो में हुई बैठक को किसी आधिकारिक बातचीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इसलिए फिलहाल इसे केवल एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी के रूप में ही देखा जा रहा है।

कोलंबो में आयोजित दक्षिण एशिया सुरक्षा सम्मेलन के बाद भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों की कथित बातचीत को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई आधिकारिक ट्रैक-2 या सरकारी वार्ता नहीं थी और सरकार की इसमें कोई औपचारिक भूमिका नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का एक साथ उपस्थित होना सामान्य बात है, लेकिन इसे दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, इस पर क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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